कोरबा के भाजपा में आंतरिक घमासान, किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर मचा बवाल

कोरबा के भाजपा में आंतरिक घमासान, किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर मचा बवाल
छत्तीसगढ़/कोरबा– कोरबा जिले में भारतीय जनता पार्टी के भीतर नियुक्तियों को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। वें है किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्षों के मनोनयन को लेकर है, जिससे भाजपा के मुख्य मंडल अध्यक्षों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्षों की घोषणा में समन्वय और सहमति की कमी को इस विरोध का मुख्य कारण बताया जा रहा है। भाजपा के स्थानीय मंडल अध्यक्षों के बीच असंतोष है कि नियुक्तियां करते समय संबंधित क्षेत्र के मुख्य भाजपा मंडल अध्यक्षों को विश्वास में नहीं लिया गया।
पार्टी की परंपरा के अनुसार, अनुषांगिक संगठनों की नियुक्तियों में स्थानीय संगठन के साथ चर्चा अनिवार्य होती है, जिसे दरकिनार किया गया।
बिना सलाह व चर्चा एवं समन्वय व सहमति किए गए इन फैसलों से कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस तरह की “एकतरफा” नियुक्तियों से पार्टी के भीतर आंतरिक खींचतान और बढ़ सकती है। यदि संगठन में इसी तरह बिना समन्वय के कार्य होंगे, तो भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों और चुनावों में तालमेल बैठाना मुश्किल होगा।
सूत्रों के अनुसार कहना है कि संगठन में मजबूती के लिए मंडल अध्यक्षों से समन्वय और सहमति जरूरी है। यदि बिना सहमति व समन्वय के नियुक्तियां होंगी, तो हम कार्यकर्ताओं को क्या जवाब देंगे –
हाल ही में किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामनारायण सराफ के द्वारा भाजपा किसान मोर्चा के कई मंडल अध्यक्षों का घोषणा किया गया जिसमें दर्री, उरगा, दीपका, हरदीबाजार ,बांकीमोंगरा व अन्य शामिल हैं । इस मामले ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि भाजपा का प्रदेश एवं जिला नेतृत्व इस असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है। क्या इन नियुक्तियों पर दोबारा विचार किया जाएगा या फिर आने वाले नियुक्तियों में मंडल अध्यक्षों से सहमति व समन्वय , चर्चा किया जाएगा, जबकि भारतीय जनता पार्टी में रिती- निति में साफ कहा गया है कि बिना मंडल अध्यक्षों के सहमति व समन्वय किसी भी मोर्चा प्रकोष्ठों की घोषणा नहीं हो सकती।
