महंगाई बढ़ी, लेकिन किसान की आय क्यों नहीं?

इंडिया पब्लिक न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट
पिछले तीन वर्षों में खेती से जुड़ी लगभग हर जरूरी चीज़ महंगी हुई है। डीजल, ट्रैक्टर से जुताई, बीज और कई जगह चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। कृषि विशेषज्ञों का भी कहना है कि डीजल की कीमत बढ़ने से खेती, सिंचाई, कटाई और परिवहन की लागत बढ़ती है, जिसका सीधा असर किसानों की लागत पर पड़ता है।
2023 बनाम 2026 (सामान्य तुलना)
1. धान खरीदी (छत्तीसगढ़): ₹3100 प्रति क्विंटल
2. डीजल: पहले से अधिक महंगा
3. ट्रैक्टर जुताई: पहले की तुलना में अधिक महंगी
4. बीज: कई किस्मों के दाम बढ़े
5. समय पर यूरिया , DAP नहीं मिलना
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, तो क्या किसानों की वास्तविक आय भी उसी अनुपात में बढ़ी है? विभिन्न विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती इनपुट लागत छोटे और सीमांत किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालती है। 2023 में धान की बिक्री 3100 रूपये क्विंटल की दर से बिकी 2023 के बाद 2026 में भी किसान की धान की बिक्री 3100 रूपये क्विंटल में ही हुआ देखा यह जा रहा है कि सभी चीजों की महंगाई बढ़ रही है तो किसानों की आय क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है
सरकार बढ़ती महंगाई के अनुपात से किसानों की आय क्यों नहीं बढ़ा पा रही है यह बहुत बड़ी सवाल है , 3 साल में लगभग हर चीज का महंगाई बढ़ गया परंतु किसान की आय में क्यों बढ़ोतरी नहीं दिखाई दे रहा है |
जनता के सवाल
* जब डीजल महंगा हुआ, तो खेती की लागत कौन वहन करेगा?
* यदि बीज और जुताई के खर्च बढ़ रहे हैं, तो किसानों का मुनाफा कैसे बढ़ेगा?
* क्या केवल समर्थन मूल्य बढ़ाना पर्याप्त है, या खेती की लागत कम करने के लिए भी नई नीति की जरूरत है?
इन सवालों के जवाब सरकार, कृषि विभाग और नीति-निर्माताओं को देने होंगे। किसानों की आय का आकलन केवल फसल के दाम से नहीं, बल्कि खेती की कुल लागत और बचत को देखकर किया जाना चाहिए।
इंडिया पब्लिक न्यूज़ की अपील: यह रिपोर्ट किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि खेती की बढ़ती लागत और किसानों की आय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर सवाल उठाने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
