बच्चों से फीस लेने में आगे , फिर सुविधाएं क्यों नहीं ? सनसाइन स्कूल की बदहाली पर जनप्रतिनिधियों का फूटा गुस्सा, DEO को शिकायत और एक माह का अल्टीमेटम

जर्जर भवन से लेकर बदहाल टॉयलेट, असुरक्षित पेयजल और उजड़े खेल मैदान तक—बच्चों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल; सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन, चक्काजाम और तालाबंदी की चेतावनी
बांकीमोंगरा/ इंडिया पब्लिक न्यूज
बांकीमोंगरा के सनसाइन हायर सेकेंडरी स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर अब सवाल महज स्कूल प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मामला शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के वार्ड क्रमांक 05 के पार्षद फणीधर कर्ष ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर स्कूल की जर्जर इमारत, मूलभूत सुविधाओं की कमी और प्रबंधन की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की है।

शिकायत में स्कूल की स्थिति को लेकर कई गंभीर बिंदु उठाए गए हैं। पत्र के मुताबिक स्कूल भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है और मरम्मत की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं विद्यार्थियों के लिए उचित एवं स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पेयजल, खेल मैदान, विज्ञान/कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पेयजल व्यवस्था असुरक्षित होने के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा बना रहता है।
‘फीस लेने में सक्रिय, सुविधा देने में नाकाम’—जनप्रतिनिधि ने उठाए सवाल
मामले को लेकर जनप्रतिनिधि एडवोकेट अमित सिन्हा ने स्कूल की व्यवस्थाओं पर तीखी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालय की स्थिति बेहद खराब नजर आई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विद्यार्थियों से फीस ली जा रही है, तो उन्हें मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं?
अमित सिन्हा के मुताबिक स्कूल परिसर में मवेशियों के घूमने तक की स्थिति सामने आई है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि एक महीने के भीतर व्यवस्थाओं में ठोस सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा। इसके बावजूद सुधार नहीं होने पर विद्यालय में तालाबंदी तक की जाएगी।
एक साल की पार्षद निधि देने को तैयार—फिर भी सवाल क्यों?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वार्ड क्रमांक 05 के पार्षद फणीधर कर्ष की सहमति से यह बात भी सामने आई है कि यदि बच्चों के भविष्य और विद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए पार्षद निधि की आवश्यकता पड़ती है, तो एक वर्ष की पार्षद निधि तक देने की तैयारी है।
यानी सवाल अब केवल संसाधनों का नहीं, बल्कि उनके सही उपयोग और विद्यालय की व्यवस्था की निगरानी का भी बन गया है।
SECL से हर साल मिलती है मरम्मत की राशि, फिर जर्जर भवन पर सवाल क्यों?
स्कूल के प्राचार्य सुरेश यादव ने बताया कि नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों द्वारा स्कूल की समस्याओं को लेकर आवेदन दिया गया है, जिसमें एक महीने के भीतर सुधार की मांग रखी गई है। प्राचार्य के अनुसार वे आवेदन को शाला विकास समिति के समक्ष रखेंगे और समिति के निर्णय के अनुसार आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
प्राचार्य ने यह भी जानकारी दी कि SECL प्रबंधन द्वारा विद्यालय भवन के रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष राशि दी जाती है। उनके अनुसार पिछले सत्र में करीब 4 लाख 27 हजार रुपये, जबकि इस वर्ष करीब 5 लाख 22 हजार रुपये प्राप्त हुए हैं। प्राचार्य के मुताबिक बरसात समाप्त होने के बाद भवन की मरम्मत का कार्य कराया जाना प्रस्तावित है।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब रखरखाव के लिए लाखों रुपये की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, तो विद्यालय की मौजूदा स्थिति इतनी बदहाल कैसे पहुंच गई? इस सवाल का जवाब अब संबंधित विभागीय जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
VHP ने भी उठाई आवाज—‘बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे’
विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने भी विद्यालय की व्यवस्थाओं पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पार्षद फणीधर कर्ष की ओर से आवेदन मिलने के बाद विद्यालय की स्थिति का जायजा लिया गया।
अमरजीत सिंह के अनुसार विद्यालय में शौचालय, पेयजल और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को देखते हुए स्कूल प्रबंधन को सुधार के लिए एक माह का समय दिया गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
अब शिक्षा विभाग की परीक्षा—क्या होगा भौतिक निरीक्षण?
पूरे मामले में सबसे अहम मांग शिक्षा विभाग से की गई है। शिकायतकर्ता ने शिक्षा विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर विद्यालय का तत्काल भौतिक निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही जर्जर भवन की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, व्यवस्थित टॉयलेट, लैब और खेल मैदान जैसी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।
अब निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी और जिला प्रशासन पर हैं। क्योंकि मामला सिर्फ किसी स्कूल की अव्यवस्था का नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा के माहौल से जुड़ा है।
बड़ा सवाल यही—लाखों की रखरखाव राशि के बावजूद स्कूल बदहाल क्यों?
अगर शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह जांच का विषय है कि विद्यालय को मिलने वाली राशि का उपयोग किस प्रकार और किन कार्यों में किया गया। क्या भवन की नियमित जांच होती है? क्या शौचालय और पेयजल की स्थिति की कभी विभागीय समीक्षा हुई? क्या शाला विकास समिति ने इन समस्याओं पर कार्रवाई की? और सबसे महत्वपूर्ण—बच्चों से ली जा रही फीस के अनुपात में उन्हें आवश्यक सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं?
अब गेंद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के पाले में है।
एक माह का अल्टीमेटम दिया जा चुका है। यदि समय रहते ठोस निरीक्षण और कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला आंदोलन और चक्काजाम तक पहुंचने की चेतावनी दी गई है।
